पौधारोपण में ‘पैसों की खेती’! गड्ढों से लेकर फेंसिंग तक हुआ करोड़ों का वारा-न्यारा

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वन परिक्षेत्र धरमपुर के नरदहा सर्किल अंतर्गत बीट कुड़रा में पौधारोपण के लिए गड्ढों की खुदाई श्रमिकों के बजाए ट्रैक्टरों से कराई गई। पौधारोपण कार्यों में हुए फर्जीवाड़े का सबूत हैं गोलाकार गड्ढे।

   मशीनों से काम कराकर श्रमिकों के नाम फर्जी भुगतान

   पुराने वृक्षों के बीच पौधारोपण, स्थल चयन पर उठे सवाल

*      उत्तर वन मण्डल पन्ना अंतर्गत कैम्पा और आरडीएफ वृक्षारोपण में भ्रष्टाचार

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में उत्तर वन मण्डल अंतर्गत विभागीय कार्यों के बजट बंदरबांट का अभियान काफी लंबे समय से लगातार चल रहा है। सरकारी धन की लूट-खसोट का सीधा असर विभाग द्वारा कराए जाने वाले निर्माण सहित पौधरोपण कार्यों की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। पौधारोपण कार्य अब पर्यावरण संरक्षण के बजाए ‘पैसों की खेती’ का जरिया बनते नजर आ रहे हैं। अटल भूजल योजना अंतर्गत तालाबों के निर्माण में सामने आए भ्रष्टाचार का मुद्दा अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब कैम्पा और आरडीएफ मद से कराए गए पौधारोपण (वृक्षारोपण) तैयारी कार्यों में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की परतें खुलने लगी हैं। तालाब और परकोलेशन पिट निर्माण की तर्ज पर पौधारोपण कार्यों में भी कुल स्वीकृत राशि का धरातल पर 50 फीसदी से भी कम खर्च करने के चक्कर में मजदूरों का काम ठेके पर मशीनों से कराया गया।
वन परिक्षेत्र अजयगढ़ की बीट सिमरा में कैम्पा मद पौधारोपण कराने के लिए स्थल सफाई कराए बगैर ठेके पर ट्रैक्टरों से गोल गड्ढों की खुदाई करा दी।
उत्तर वन मण्डल पन्ना अंतर्गत आने वाली समस्त रेन्जों में आगामी मानसून सीजन में करीब आधा सैंकड़ा स्थानों पर लाखों पौधे रोपित करने के लिए ट्रेक्टरों से गोलाकार गड्ढों की खुदाई करा दी गई। जबकि गड्ढों की खुदाई वर्गाकार आकृति में की होनी थी। अपवाद स्वरूप कुछेक बीटों को छोड़ दें शेष सभी जगह नजर आ रहे पौधारोपण के गोल गड्ढे खुद ही भ्रष्टाचार की गवाही दे रहे हैं। कार्य प्रभारी बीटगार्ड से लेकर डीएफओ की मिलीभगत के चलते गड्ढों की खुदाई खुलेआम ट्रैक्टरों से कराने के बाबजूद मजदूरों के नाम बनाए गए करोड़ों रुपए के फर्जी प्रमाणकों का भुगतान हो गया। मामला मीडिया के संज्ञान में आने पर अंदरखाने मचे हड़कंप के चलते अब कुछ स्थानों पर गोल गड्ढों का गोलमाल छिपाने मजदूर लगाकार गड्ढों को निर्धारित आकृति (आकार) देने का कार्य ठेके पर कराया जा रहा है। पौधारोपण तैयारी कार्यों व्यापक पैमाने पर की गई धांधली सिर्फ गड्ढों तक सीमित नहीं, यह स्थल चयन से शुरू होकर चेन लिंक फेंसिंग मटेरियल की गुणवत्ता तक जाती है।

स्थल चयन की स्वीकृति पर सवाल

वन परिक्षेत्र धरमपुर के नरदहा सर्किल अंतर्गत बीट नरदहा में पहले से लगे पेड़ों के बीच नए पौधारोपण के लिए गड्ढों की खुदाई कराई गई।
उत्तर वन मण्डल पन्ना के वन परिक्षेत्र धरमपुर में सर्किल नरदहा अंतर्गत ग्राम नरदहा से सटे वन क्षेत्र में पौधारोपण के लिए जिस स्थल का चयन किया गया है वहां पहले से 15 से 20 वर्ष पुराने पेड़ अच्छी-खासी तादाद में खड़े हैं। पहले से खड़े वृक्षों के आसपास या बीच में खाली जगह पर नए पौधे रोपित करने गड्ढों की खुदाई के पूर्व खरपतवार हटाने स्थल सफाई तक नहीं कराई गई। इतना ही ज्यादा से ज्यादा गड्ढे खोदने के चक्कर में उनके बीच निर्धारित दूरी का मापदंड यहां मजाक बन चुका है। गड्ढों की लंबाई, चौड़ाई और गहराई भी एक समान नहीं है।
वन परिक्षेत्र धरमपुर के नरदहा सर्किल अंतर्गत छनिहापुरवा में पुराने सघन जंगल के बीच में रिक्त भूमि को नए पौधारोपण के लिए चुना गया।
नरदहा बीट में ही छनिहपुरवा गांव के सिंचाई जलाशय के बगल में भी जहां 20 से 50 वर्ष पुराने वृक्षों का घना जंगल खड़ा है वहां बीच-बीच में रिक्त स्थान पर गड्ढों की खुदाई करवाकर आगामी बारिश के सीजन पौधे रोपित कराने की तैयारी चल रही है। वन विभाग के जानकार उक्त दोनों स्थानों पर पौधारोपण कार्यों को स्वीकृति मिलने पर ही सवाल उठा रहे हैं। उनका मानना है कि, स्थानीय अधिकारियों के द्वारा ज्यादा से ज्यादा पौधारोपण कार्य स्वीकृत करवाकर नोट छापने के लिए भोपाल में बैठे वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों को गुमराह किया। दोनों ही जगह पौधों की सुरक्षा पुख्ता करने खड़े किए गए सीमेंट पोल और सुरक्षा जाली की गुणवत्ता भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है।

ट्रैक्टरों से कराई गड्ढों की खुदाई

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार वन परिक्षेत्र अजयगढ़ की बीट बरकोला में 20 हेक्टेयर, बीट सिमरा 50 हेक्टेयर और वन परिक्षेत्र धरमपुर की बीट कुड़रा में 40 हेक्टेयर वन भूमि पर कैम्पा मद से वृक्षरोपण कराने के लिए पिछले माह ट्रैक्टर लगवाकर ठेके पर हजारों गड्ढे खुदवाए गए। सूत्रों ने बताया कि ट्रैक्टर से प्रत्येक गड्ढे की खुदाई का ठेका साइज के हिसाब से 3 से 4 रुपए में दिया गया। जबकि मजदूरों (श्रमिकों) के नाम पर बनाए गए फर्जी प्रमाणकों में प्रत्येक गड्ढे की खुदाई की मजदूरी न्यूनतम 12-13 रुपए से लेकर अधिकतम 25 रुपए तक दर्ज की गई। ठेके पर मशीनों से काम करवाने के बाद कार्य प्रभारी बीटगार्ड, संबंधित सर्किल प्रभारी और रेंजरों सुनियोजित तरीके से अपने विश्वासपात्र तथा करीबी लोगों के नाम बिल-बाउचर (प्रमाणक) में मजदूरी करने वाले श्रमिकों के रूप दर्ज कर दिए। ताकि उनके खातों में होने वाले मजदूरी भुगतान की राशि आसानी से उन तक पहुंच सके।
वन परिक्षेत्र धरमपुर के नरदहा सर्किल अंतर्गत छनिहापुरवा में सिंचाई जलाशय के समीप कराए जा रहे पौधारोपण की फेंसिंग सामग्री मानक स्तर की नहीं।
फील्ड में हुए कार्यों की सच्चाई जांनने के बाद भी डीएफओ साहब ने समाप्त हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम माह पौधारोपण तैयारी कार्य के करोड़ों रुपए के प्रमाणकों का भुगतान कर दिया। जबकि इन बीटों में भी चेन लिंक फेंसिंग में लगाए गए सीमेंट पोल और लोहे की जाली आदि सामग्री की गुणवत्ता मानक स्तर की नहीं है। पौधारोपण स्थल पर तालाब और परकुलेशन पिट का निर्माण कार्य भी पूर्णतः मशीनों से ही कराया गया। बता दें कि इसके पूर्व रडार न्यूज़ ने वन परिक्षेत्र अजयगढ़ की बीट धवारी, टौरिया और देवरभापतपुर में स्वीकृत पौधारोपण हेतु ट्रैक्टरों से ठेके पर हजारों की तादाद में गोल गड्ढों की खुदाई के मामले को उजागर किया था।

जानकारी मांगने पर अफसरों से साधी चुप्पी

उत्तर वन मण्डल कार्यालय पन्ना। (फाइल फोटो)
उल्लेखनीय है कि, जब इस मामले से संबंधित अधिकारियों से जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया गया तो अजयगढ़-धरमपुर रेंजर से लेकर एसडीओ, डीएफओ धीरेन्द्र प्रताप सिंह और मुख्य वन संरक्षक वृत छतरपुर नरेश यादव तक ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। पौधरोपण तैयारी कार्यों में हुई अनियमितताओं को लेकर खबर प्रकाशित करने के लिए आवशयक बुनियादी जानकारी मसलन प्रोजेक्ट रिपोर्ट अनुसार उक्त कार्यों की लागत, रोपित किए जाने वाले पौधों की संख्या, क्षेत्रफल और अब तक व्यय हुई राशि आदि का डिटेल जानने जब उक्त अधिकारियों से संपर्क किया गया तो उनकी प्रतिक्रिया ऐसी थी जैसे कि उन्हें ‘सांप सूंघ गया हो’। करीब 2 सप्ताह से जानकारी देने में आनाकानी और टालमटोल करते हुए रेंज अफसर अब अपने अधीनस्थों से कई तरह के संदेश पहुंचा रहे हैं। फोन कॉल, व्हाट्सएप्प पर और समक्ष में उपस्थित होकर जानकारी मांगे जाने के बाबजूद जानकारी नहीं दी गई। अधिकारियों की यह चुप्पी न सिर्फ पूरे मामले को संदिग्ध बनाती है बल्कि शासकीय कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही के दावों पर भी प्रश्नचिन्ह खड़े करती है।

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