पहली बार देखा सभी का ख्याल रखने वाला शिवराज जैसा मुख्यमंत्री

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सम्मेलनों में मुख्यमंत्री से मिलकर गदगद हैं सभी वर्ग के लोग 

भोपाल। मध्यप्रदेश में किसान, श्रमिक और अन्य गरीब वर्ग मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को दिल से अपने परिवार का मुखिया मानने लगा है। मुख्यमंत्री का देहाती क्षेत्रों में दिन-रात तूफानी दौरा और गाँव वालों से सहज भाव से मन की बात करने की शैली से ये सभी बहुत प्रभावित हैं। प्रदेशभर में बड़े स्तर पर हो रहे सम्मेलनों में अब गरीब वर्ग, किसान और श्रमिक अपनी मर्जी से मुख्यमंत्री से मिलने और बातचीत के लिये पहुँचने लगे हैं। नौतपा की तेज गर्मी भी लोगों को मुख्यमंत्री से मिलने से रोक नहीं पाई है।

हाल ही में 26 मई को आगर-मालवा में हुए तेंदूपत्ता संग्राहक एवं श्रमिक सम्मेलन में सभी वर्गों के जरूरतमंद महिला-पुरुष मुख्यमंत्री श्री चौहान का अपनापन पाकर गद्गद हो गये। कृषक धीरज सिंह, भगवान सिंह चौहान, राजू बाई, सुजान सिंह, दिनेश कुमार, बहादुर सिंह, दयाराम, विक्रम का कहना है कि हमारी हर समस्या, हर जरूरत बिना हमारे बोले मुख्यमंत्री खुद आगे बढ़कर पूरी कर रहे हैं। जिंदगी में पहली बार देख रहे हैं गरीबों, किसानों और सबका ख्याल रखने वाला शिवराज जैसा मुख्यमंत्री।

सम्मेलन में मुख्यमंत्री से मिलने के बाद किसान धीरज सिंह ने खेती छोड़ने का इरादा बदल दिया है। उनके दो बेटे और एक बेटी है। उनका कहना है कि अब हम खेती का नफा-नुकसान क्यों सोचें। अब तो बेटों को भी खेती में ही लगाऊँगा। मुख्यमंत्री ने भावांतर भुगतान योजना में प्रोत्साहन राशि देकर हमें बर्बाद होने से बचाया है। उन्होंने किसानों के लिये जितना किया है, इसके पहले किसी मुख्यमंत्री ने नहीं किया। ग्राम रातड़िया के किसान दयाराम किसानों के हित में लिये गये फैसलों से खुश हैं और चैन से अगली फसल की तैयारी कर रहे हैं। 



ग्राम पचेटी के किसान भगवान सिंह चौहान ने पिछले साल 100 क्विंटल गेहूँ बेचा था। राज्य सरकार ने उन्हें इस साल, पिछले साल बेचे गेहूँ पर 20 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी है। समर्थन मूल्य पर चना बेचने पर उन्हें 4400 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ मिला है। पहले चना बेचने पर 3400 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल पाता था। पिछले सीजन में 70 क्विंटल चना बेचा था। इस प्रकार उन्होंने 70 हजार रुपये मुनाफा कमाया है। ग्राम हाबर के किसान शंकरलाल राठौर की पिछले वर्ष फसल खराब हो गई थी। उन्होंने कृषि अधिकारियों की मदद से क्लेम भरा। कम समय में उन्हें 2 हजार रुपये प्रति बीघा की दर से फसल बीमा मुआवजा की राशि मिल गई। ग्राम गंगापुर के किसान सुजान सिंह बरनावत भावांतर भुगतान योजना को किसानों के लिये संजीवनी बताते हैं।

ग्राम रोकड़ा के किसान बहादुर सिंह परम्परागत खेती करते थे। भावांतर भुगतान योजना में अन्य फसलों को भी शामिल करने के बाद उन्होंने सरसों और मसूर भी लगाने का निर्णय लिया। ग्राम कनासिया के किसान विक्रमसोयाबीन का 2800 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिलने पर खुश है। ग्राम हिरपुरभज्जा शाजापुर के 55 वर्षीय निर्धन शिवनारायण ने प्रधानमंत्री आवास योजना में घर मिलने पर मुख्यमंत्री की तारीफ की है। पहले उनके सिर पर केवल बरसाती होती थी। अब पक्की छत है। ग्रामीण बाबूलाल अहिरवार ने मुख्यमंत्री पेयजल योजना से उनके गाँव की पीने के पानी की समस्या हल होने पर राज्य शासन का आभार माना है। ग्राम कानड़ के खेतिहर मजदूर रघुराम ने बताया कि पहले मजदूरों की तकलीफ को कोई समझता नहीं था। हम लोग अकेले ही अपनी तकलीफ सहते थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने असंगठित श्रमिक कल्याण योजना लागू कर बहुत बड़ी राहत पहुँचाई है। इसी गाँव की राजूबाई को उज्जवला योजना में गैस कनेक्शन मिलने से उसका परिवार खुश है।

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