तेंदुए के हमले में बालक की मौत के बाद बाघ शावक के हमले में महिला घायल

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बाघ शावक के हमले की घटना को गंभीरता से लेते हुए पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने पलकोहा के ग्रामीणों से संवाद कर उन्हें आवशयक सतर्कता बरतने की सलाह दी।

*     पन्ना टाइगर रिजर्व के चन्द्रनगर परिक्षेत्र के पलकोहा गांव की घटना

*     सुरक्षा व्यवस्था सख्त करते हुए बढ़ाई गश्ती, कैमरा ट्रैप और ड्रोन से निगरानी

*     इलाके में लगातार बढ़ रहा मानव-वन्यजीव संघर्ष, ग्रामीण भयभीत और आक्रोशित

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व समेत पन्ना जिले के सामान्य वन क्षेत्रों से सटे गांवों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिससे वन वन क्षेत्र से लगे ग्रामों के वाशिंदों में भय, चिंता और आक्रोश का माहौल है। सप्ताह भर पूर्व पन्ना टाइगर रिजर्व की पन्ना कोर रेंज से सटे जरधोवा गांव में तेंदुए ने एक 12 वर्षीय बालक पर हमला कर उसे अपना शिकार बना लिया था। घटनास्थल पर बालक का सिर और धड़ अलग-अलग मिले, जबकि तेंदुआ शव के कुछ हिस्सों को खा चुका था। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद से क्षेत्र के ग्रामीण गहरे सदमे में हैं। इसी क्रम में पन्ना टाइगर रिजर्व के चंद्रनगर परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम पलकोहा में खेत में कार्य कर रही एक महिला पर बाघ के शावक के हमले की घटना सामने आई है। हालांकि महिला को केवल मामूली खरोचें आईं और उपचार के बाद वह स्वस्थ होकर घर लौट आई, लेकिन इस घटना ने ग्रामीणों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। उल्लेखनीय है कि, पन्ना टाइगर रिजर्व का एरिया तीन जिलों पन्ना, छतरपुर और दमोह जिले की सीमाओं तक फैला है। जिसमें चंद्रनगर वन परिक्षेत्र का इलाका छतरपुर जिले में स्थित है।

खेत में काम करते समय किया हमला

वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते 3 फरवरी की शाम लगभग 6 बजे, चंद्रनगर परिक्षेत्र की बीट पलकोहा (कक्ष क्रमांक P-538) के समीप राजस्व क्षेत्र में खेत में काम कर रही महिला पर बाघ के शावक ने हमला कर दिया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घायल महिला को शासकीय वाहन से जिला अस्पताल छतरपुर भेजा गया। महिला के पैर में आई मामूली चोटों का उपचार किया गया तथा तात्कालिक सहायता के रूप में रुपए 1,000/- की राशि भी प्रदान की गई। दो दिन के उपचार के बाद 5 फरवरी को महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

भालू के हमलों ने भी बढ़ाई दहशत

पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र तथा पन्ना जिले के सामान्य वन क्षेत्र के आसपास स्थित गांवों में केवल तेंदुआ और बाघ ही नहीं, बल्कि हाल के दिनों में भालू के हमलों में बुजुर्गों के गंभीर रूप से घायल होने की घटनाएं भी सामने आई हैं। पन्ना जिले के दक्षिण वन मंडल और उत्तर वन मंडल अंतर्गत हाल के दिनों में घटित भालू के हमलों की घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इलाके में वन क्षेत्र के आसपास मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है। वन क्षेत्र से लगे खेतों में फसल की सुरक्षा के लिए झोपड़ी बनाकर रात में खेतों में रुकने वाले किसान सबसे अधिक भयभीत हैं। जरधोवा में बालक की दर्दनाक मौत और अब पलकोहा की घटना के बाद ग्रामीण खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

वन विभाग अलर्ट, गश्त और निगरानी बढ़ाई

पन्ना टाइगर रिजर्व का मड़ला ग्राम में स्थित प्रवेश द्वार। (फाइल फोटो)
मानव-वन्यजीव संघर्ष की इन घटनाओं के बीच पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था सख्त करने के निर्देश दिए हैं। चंद्रनगर परिक्षेत्र में दो दल दिन-रात सघन गश्त कर रहे हैं। बाघ और शावक की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए दो जोड़ी कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं तथा ड्रोन के माध्यम से हवाई निगरानी भी की जा रही है। अधिकारियों द्वारा घटनास्थल का सूक्ष्म निरीक्षण कर बाघ और शावक की मौजूदगी की पुष्टि की गई है।

ग्रामीणों से संवाद, सतर्कता बरतने की अपील

पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक वीरेन्द्र पटेल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि, ग्राम पलकोहा में वन विभाग द्वारा ग्रामीणों के साथ बैठक आयोजित कर संवाद किया गया। ग्रामीणों को सूर्यास्त के बाद खेतों की ओर न जाने, दिन में समूह बनाकर ही खेतों में जाने और लाठी/डंडा साथ रखने की सलाह दी गई। विभाग का कहना है कि पलकोहा गांव टाइगर रिजर्व के भीतर स्थित होने के कारण यहां के निवासी वन्यजीवों के स्वभाव से परिचित हैं, फिर भी जनसुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। बहरहाल, लगातार हो रही घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र समेत पन्ना जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष अब एक गंभीर सामाजिक संकट का रूप ले चुका है, जिससे निपटने के लिए दीर्घकालीन और ठोस रणनीति की आवश्यकता है।