हृदयविदारक घटना: बालक पर हमला कर तेंदुए ने बनाया निवाला, सिर और धड़ अलग-अलग मिलने से इलाके में दहशत

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घटनास्थल पर पड़े आदिवासी बालक के धड़ एवं सिर को देखते हुए पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारी-कर्मचारी और स्थानीय ग्रामीण।

*     पन्ना टाइगर रिजर्व की पन्ना कोर रेंज से सटे जरधोवा गांव की घटना

*     फसल की रखवाली करने खेत में रह रहे आदिवासी परिवार पर टूटा वज्रपात

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना में मानव-वन्यजीव संघर्ष की दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है, जिसने वन क्षेत्र के आसपास स्थित ग्रामों एवं खेतों में रहने वालों को दहशत में डाल दिया। पन्ना टाइगर रिजर्व की पन्ना कोर रेंज से सटे खेत में झोपड़ी बनाकर रह रहे किसान बहादुर आदिवासी के 12 वर्षीय पुत्र देव आदिवासी को गुरुवार शाम घात लगाए बैठे तेंदुए ने हमला कर मौत के घाट उतार दिया। शुक्रवार सुबह खेत में महुए के पेड़ के पास बालक का सिर और धड़ अलग-अलग मिलने से गांव में हड़कंप मच गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बहादुर आदिवासी फसल की रखवाली के लिए अपने परिवार के साथ खेत में रहता है। गुरुवार की शाम उसका पुत्र देव, खेत के नजदीक स्थित अपने दादा को खाना देने उनकी झोपड़ी की ओर गया था। इसी दौरान रास्ते में झाड़ियों में छिपे तेंदुए ने अचानक हमला कर दिया। रात में घटना का पता नहीं चल सका, लेकिन आज सुबह जब खेत में महुए के पेड़ के पास देव का क्षत-विक्षत शव देखा गया, तो पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक निवेदिता नायडू स्वयं मौके पर पहुंचीं और घटनास्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान पन्ना कोतवाली थाना निरीक्षक रोहित मिश्रा, पुलिस बल, पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारी तथा मैदानी कर्मचारी भी मौजूद रहे। घटना स्थल के दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। खेत की मिट्टी और फसलों के बीच बच्चे का सिर और धड़ अलग-अलग पड़े मिले, जो हमले की भयावहता को बयान करने के लिए काफी हैं। शांत रात में हुआ यह हमला सुबह होते-होते पूरे इलाके में दहशत बनकर फैल गया। ग्रामीण भयभीत हैं, खेतों और झोपड़ियों में रह रहे परिवार खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

इन साक्ष्यों से पता चला तेंदुए ने किया हमला

तेंदुए के हमले में बालक की मौत होने की सूचना मिलने पर कोतवाली थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का मुआयना किया।
पन्ना टाइगर रिजर्व के नवागत उप संचालक वीरेन्द्र पटेल द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 23 जनवरी 2026 को प्रातः लगभग 8:30 बजे परिक्षेत्र सहायक अकोला बफर को ग्राम जरधोवा में जंगली जानवर के हमले से बालक की मृत्यु की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना मिलते ही सहायक संचालक पन्ना, सहायक संचालक मड़ला, परिक्षेत्र अधिकारी पन्ना कोर अजीत जाट वन अमले के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस एवं राजस्व अमला भी घटनास्थल पर उपस्थित रहा। मौके पर महुआ के पेड़ के पास बालक देव गोंड़ पिता बहादुर गोंड़ का शव क्षत-विक्षत अवस्था में पड़ा मिला। निरीक्षण के दौरान बीट अकोला कक्ष क्रमांक पी-378 से लगे क्षेत्र में महुआ के पेड़ पर मांसाहारी वन्यप्राणी के नाखूनों की खरोंच, टहनी पर खून के निशान तथा पेड़ के नीचे मृतक के सिर के बाल पाए गए। इन परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया यह हमला तेंदुए द्वारा किया जाना प्रतीत होता है।

घटना के बाद वन अमले ने बढ़ाई निगरानी

घटनास्थल के निरीक्षण उपरांत शव को पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई हेतु पन्ना टाइगर रिजर्व की शासकीय एम्बुलेंस से परिजन के साथ पन्ना भेजा गया। बेटे की दर्दनाक मौत के बाद से आदिवासी दंम्पत्ति का रो-रोकर बुरा हाल है। मामले में जनहानि प्रकरण तैयार कर लिया गया है तथा पीड़ित परिवार को 8 लाख रुपए की सहायता राशि के भुगतान हेतु उप संचालक की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है, भुगतान की प्रक्रिया जारी है। घटना के बाद पन्ना टाइगर रिजर्व द्वारा क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन और निगरानी बढ़ा दी गई है, वहीं कोर और बफर क्षेत्र से सटे गांवों को सतर्क किया गया है। लगातार हो रही घटनाओं ने एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष को गंभीर सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।

सालभर पूर्व बाघ ने वृद्धा को बनाया था निवाला

पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ के हमले में मृत महिला के शव को लेकर हिनौता गेट से बाहर निकलता एम्बुलेंस वाहन। (फाइल फोटो)
यह घटना कोई अपवाद नहीं, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर और लगातार बढ़ती चेतावनी है। महज सालभर पहले पन्ना टाइगर रिजर्व अंतर्गत हिनौता रेंज में भी ऐसी ही भयावह घटना सामने आई थी। जंगल में पशुओं के लिए चारा लेने गई आधा दर्जन महिलाओं में से हिनौता गांव की एक वृद्ध महिला को बाघ परिवार ने शिकार बना लिया था। महिला के शव को भूखे बाघों से छुड़ाने के लिए अमले को भारी मशक्कत करनी पड़ी थी। हाथियों की मदद के बाद कहीं जाकर क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ था, तब तक शरीर के कई अंगों को बाघ अपना निवाला बना चुके थे।

वन क्षेत्र के समीप रहने वालों की सुरक्षा पर सवाल

लगातार हो रही वन्यजीवों के हमले की घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कोर और बफर क्षेत्रों से सटे गांवों में रह रहे लोगों की सुरक्षा के लिए क्या पर्याप्त इंतजाम हैं? खेतों में झोपड़ी बनाकर गुजर-बसर करने वाले परिवार हर रात जान हथेली पर रखकर सोने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक स्थायी सुरक्षा व्यवस्था, रात्रि गश्त, चेतावनी तंत्र और पुनर्वास जैसे ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक ऐसी घटनाओं का खतरा बना रहेगा। जरधोवा की यह दर्दनाक घटना न सिर्फ एक मासूम की जान ले गई, बल्कि भविष्य के उस खतरे की ओर भी इशारा कर गई है, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।