
* स्टेट हाईवे-55 पर पन्ना–अजयगढ़ के बीच रुंज बांध क्षेत्र का मामला
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) स्टेट हाईवे-55 पर पन्ना–अजयगढ़ मार्ग के बीच रुंज बांध क्षेत्र में जल संसाधन विभाग पन्ना द्वारा निर्मित 4 किलोमीटर लंबी डायवर्सन रोड आज अपने निर्माण के महज एक साल के भीतर ही पूरी तरह उखड़ चुकी है। लगभग 9 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह सड़क अब कागजी गुणवत्ता और जमीनी हकीकत के बीच के भयानक अंतर को उजागर कर रही है। सड़क की मौजूदा हालत की तस्वीरें (फोटो) किसी बयान या सफाई की मोहताज नहीं हैं। जगह-जगह उखड़ी परतें, धंसी हुई सतह, बड़े-बड़े गड्ढे और बिखरा हुआ मटेरियल साफ संकेत देता है कि सड़क की यह जर्जर स्थिति सामान्य घिसावट का नहीं, बल्कि घटिया निर्माण और तकनीकी अनदेखी का परिणाम है। सड़क निर्माण से जुड़े जानकारों का मानना है कि नई बनी सड़क में समय के साथ सूक्ष्म पेंच या सतही दरारें आ सकती हैं, लेकिन यदि सड़क गुणवत्ता मानकों के अनुरूप बनी हो तो एक साल के भीतर उसका इस कदर जर्जर हो जाना असंभव है। यह स्थिति सीधे तौर पर इस ओर इशारा करती है कि या तो निर्माण के समय सब-स्टैंडर्ड मटेरियल का उपयोग हुआ, या फिर तकनीकी निगरानी केवल फाइलों तक ही सीमित रही।
गारंटी पीरियड में सड़क खस्ताहाल, जवाबदेह कौन?

सबसे गंभीर तथ्य यह है कि यह सड़क अभी गारंटी पीरियड में है। नियमों के अनुसार इस अवधि में सड़क के रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की होती है। इसके बावजूद सड़क को उसकी बदहाली पर छोड़ दिया जाना यह दर्शाता है कि ठेकेदार को खुली छूट और विभागीय संरक्षण प्राप्त है। सड़क की हालत को देखकर यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या जल संसाधन विभाग किसी बड़े हादसे या जनहानि का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद जांच और बयानबाजी का सिलसिला शुरू होगा? रुंज सिंचाई परियोजना के डूब क्षेत्र में पुरानी सड़क का कुछ हिस्सा आने के बाद यातायात को चालू रखने के उद्देश्य से यह वैकल्पिक मार्ग बनाया गया था। लेकिन आज यही मार्ग दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के लिए खतरे का पर्याय बन गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक आए दिन वाहन अनियंत्रित होकर पलटने का खतरा बढ़ गया है। वहीं दुपहिया चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं और छिटपुट दुर्घटनाएं अब आम हो चुकी हैं। यातयात को सुरक्षित बनाने के बजाए वाहन चालकों-यात्रियों को खस्ताहाल सड़क पर चलने के लिए मजबूर करके उनके जीवन को जानबूझकर खतरे में डाला जा रहा है। जिम्मेदारों की यह बेपरवाही गंभीर आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में आती है।
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