मलबे में तब्दील 1 हजार साल पुराने मंदिर पुनः आकार लेंगे, भग्नावशेषों को सुरक्षित निकालने का काम जारी

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पन्ना जिले की रैपुरा तहसील अंतर्गत सलैया-समारी ग्राम में प्रतिहार कालीन मंदिरों के मलबा की सफाई कर भग्नावशेषों सुरक्षित करने का काम जारी है।

*     पुरातात्विक विधि से तकनीकी दल की देखरेख में चल रहा मलबा सफाई कार्य

*     अब तक भगवान गणेश, विष्णु और चामुण्डा की पाषाण प्रतिमाएं मिलीं

*     पन्ना जिले की रैपुरा तहसील अंतर्गत सलैया समारी ग्राम में मिले भग्नावशेष

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) बहुमूल्य रत्न हीरों की धरती के रूप में विश्व विख्यात मध्यप्रदेश का पन्ना जिला अपनी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत के लिए भी जाना जाता है। पन्ना में आदिम युग से लेकर मानव सभ्यता के विकास से जुड़े विभिन्न कालखण्डों और अनेक राजवशों से संबंधित पुरा अवशेष मौजूद हैं। सैंकड़ों वर्ष पूर्व यहां स्थापत्य कला की दृष्टि से दो अनूठे मंदिर स्थित थे। लेकिन समय के थपेड़ों की मार में इनका अस्तित्व लगभग खो चुका है। भगवान शिव और विष्णु के ये मंदिर एक हजार साल बाद अब फिर से आकार लेंगे। देखरेख के आभाव में सदियों पहले मलबे में तब्दील हो चुके ऐतिहासिक महत्व के दोनों मंदिरों के गौरवशाली अतीत को पुनः जीवंत करने की दिशा में पुरातत्व विभाग ने प्राथमिक चरण का कार्य शुरू कर दिया है। इसके तहत प्राचीन मंदिर के मलबे की पुरातात्विक विधि से सफाई करवाकर मंदिर के भग्नावशेषों की खोज की जा रही है। 11वीं शताब्दी के इन मंदिरों का संबंध प्रतिहार काल से बताया जाता है।
पन्ना जिले के दूरस्थ इलाके रैपुरा तहसील के सलैया-समारी ग्राम में इन दिनों ऐतिहासिक महत्त्व के स्थल पर मलबा सफाई का कार्य चल रहा है। जोकि क्षेत्र के लोगों के बीच कौतूहल का विषय बना हुआ है। आयुक्त पुरातत्व-अभिलेखागार एवं संग्रहालय भोपाल के निर्देश पर मलबा सफाई का कार्य पुरातत्वीय अधिकारी डॉ. रमेश यादव के मार्गदर्शन में तकनीकी दल के द्वारा पुरातात्विक विधि से कराया जा रहा है। मलबा सफाई/ विशेष खुदाई कार्य के दौरान अब तक वहां से भगवान गणेश, विष्णु और चामुंडा की प्रतिमाएं निकलीं है। यहां आगे भी प्रतिमाएं एवं भग्नावशेष मिलने की संभवना जताई जा रही है। दरअसल, मलबा सफाई का कार्य जिस स्थल पर कराया जा रहा है वहां सैंकड़ों वर्ष पूर्व कभी भगवान शिव और विष्णु के मंदिर स्थित थे। 11वीं शताब्दी के बताए जा रहे दोनों मंदिर कालांतर में मलबे में तब्दील हो गए, मौके पर इनका अस्तित्व अब भग्नावशेषों के रूप में नजर आता है। प्रतिहार कालीन इन मंदिरों के ऐतिहासिक महत्व को दृष्टिगत रखते हुए मलबे की सफाई करवाकर मंदिर के भग्नावशेषों को सुरक्षित किया जा रहा है। मलबा सफाई से निकले प्राचीन मंदिरों के भग्नावशेष अपने बुलंद इतिहास की गवाही दे रहे हैं।

मलबा सफाई कार्य में लगेंगे 6 माह

पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों की देखरेख में चल रहे प्राचीन मंदिरों के मलबा की सफाई में निकली भगवान विष्णु की प्रतिमा।
तकनीकी दल में शामिल जिला पुरातत्व संग्रहालय हिन्दूपत महल पन्ना के संग्रहाध्यक्ष सुल्तान सिंह ने रडार न्यूज़ को बताया, फ़िलहाल शिव मंदिर के मलबा की सफाई कराई जा रही है। जिसमें मंदिर के जंगाभाग प्रतिमायें नवग्रह पैनल मिला है। यह मंदिर के गर्भगृह के प्रवेश द्वारा लगा रहता है। दोनों मंदिरों के मलबे की सफाई में करीब 5-6 माह का समय लगने की बात कही जा रही है। क्योंकि, भग्नावशेषों की सुरक्षा और उनके मूलस्वरूप को बनाए रखने मलबा का सफाई कार्य बेहद सावधानी पूर्वक श्रमिकों की मदद से कराया जाता है। इसमें मशीनों का उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित रहता है। संग्रहाध्यक्ष श्री सिंह ने बताया, आयुक्त पुरातत्व-अभिलेखागार एवं संग्रहालय भोपाल से अभी सिर्फ प्राचीन मंदिरों के मलबा सफाई कार्य की स्वीकृति मिली है। अस्तित्व खो चुके मंदिरों के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया का यह प्रारंभिक चरण है। आगामी समय में निश्चित ही सलैया-समारी ग्राम में भगवान शिव और विष्णु जी के मंदिर पुनः आकार लेंगे। ये ठीक वैसे ही नजर आयेंगे जैसे एक हजार साल पहले दिखते थे। अर्थात गौरवशाली अतीत और प्रतिहार कालीन प्राचीन स्थापत्य कला के उत्कृष्ट नमूने मलबे से पुनः जीवंत हो उठेंगे। हालांकि इसमें अभी लंबा वक्त लगेगा।

आधा दर्जन मंदिरों का होगा पुनर्निर्माण

मालूम हो कि रैपुरा के सलैया-समारी ग्राम के प्रतिहार कालीन मंदिरों की तर्ज पर जिले भर के करीब आधा दर्जन मंदिरों का भविष्य में पुनर्निर्माण करने की योजना प्रस्तावित है। जिस पर सैद्धांतिक सहमति भी बन चुकी है। जिला पुरातत्व संग्रहालय हिन्दूपत महल पन्ना के संग्रहाध्यक्ष सुल्तान सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि अस्तित्व खो चुकी ऐतिहासिक विरासत को पुनर्जीवित करने का कार्य पन्ना के पूर्व संग्रहाध्यक्ष डॉ. गोविंद बाथम के सर्वेक्षण के आधार पर किया जा रहा है। डॉ. गोविंद बाथम ने जिले भर में भ्रमण कर कई महीनों की कड़ी मेहनत के बाद ऐतिहासिक महत्व के आधा दर्जन प्राचीन मंदिरों/स्मारकों को चिन्हित किया था जिन्हें पुनर्जीवित किया जाना पन्ना के समृद्ध गौरवशाली इतिहास के लिहाज से आवश्यक है। डॉ. बाथम वर्तमान में शासकीय महाविधायलय माड़ा जिला सिंगरौली में प्राध्यापक के पद पर पदस्थ है।